एक आदमी रोज़ एक तोते को देखता जो पिंजरे में बंद था।
एक दिन उसने पिंजरा खोल दिया — तोता उड़ गया।
अगले दिन वो फिर लौटा और वही पिंजरे के ऊपर बैठा मिला।
वो मुस्कुराया — “तू गया भी और फिर आया भी।”
तोता बोला — “आज़ादी का मतलब दूर जाना नहीं,
जहाँ प्यार हो वहाँ रहना है।”
प्रकृति यही सिखाती है —
बांधो मत, भरोसा करो।
जानवर और इंसान में बस इतना फ़र्क है —
वो बिना बोले भी प्यार निभा देते हैं।
और इंसान बोलकर भी भूल जाते हैं।
अगर इंसान थोड़ी सादगी सीख ले,
तो धरती फिर से स्वर्ग बन सकती है।