Log in to Faxo
All your favorite apps in oneInvest in Faxo
Continue with Google
Continue with Facebook
Continue with Apple
Use phone, email, or Bluesky
📰 कल्पकथा की २०२वीं काव्यगोष्ठी में हास्य-श्रृंगार की रसधारा, साहित्य रसिकों का हुआ अभिनन्दन! 📰
🌸 “साहित्य सृजन औषधि है, जो जीवन को स्वस्थ और आनंदमय बनाता है।” — कल्पकथा परिवार 🌸
हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति एवं सद्साहित्य के संवर्धन हेतु कृतसंकल्प कल्पकथा साहित्य संस्था की २०२वीं ऑनलाइन काव्यगोष्ठी दिनांक २२ जून २०२५ को अत्यंत हर्षोल्लास एवं कलात्मक गरिमा के साथ सम्पन्न हुई, जिसमें हास्य-व्यंग्य एवं शृंगार रस की सरस रचनाओं ने साहित्य प्रेमियों को भाव-विभोर कर दिया।
🪔 कार्यक्रम अध्यक्ष: डॉ. ॐ ऋषि भारद्वाज (वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षक, एटा, उ.प्र.)
🎤 मुख्य अतिथि: डॉ. निधि जैन बोथरा (संस्थापक, आराधिका राष्ट्रीय साहित्य मंच, पश्चिम बंगाल)
🎙️ संचालन: आशुकवि श्री भास्कर सिंह 'माणिक' (कोंच जालौन) एवं पवनेश मिश्रा (छतरपुर, म.प्र.)
🕉️ गुरुवंदना, गणेशवंदना एवं सरस्वती वंदना की संगीतमय प्रस्तुति वरिष्ठ साहित्यकार श्री विजय रघुनाथराव डांगे (नागपुर) द्वारा हुई, जिससे गोष्ठी का शुभारम्भ आध्यात्मिक आभा से आलोकित हो उठा।
इस गोष्ठी की विशेष उपलब्धि रही वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती संध्या श्रीवास्तव "साँझ" (छतरपुर, म.प्र.) की ३७वीं वैवाहिक वर्षगांठ, जिनको उपस्थित समस्त साहित्यकारों एवं संस्था परिवार ने आत्मीय शुभकामनाएँ अर्पित कीं।
🎙️ प्रमुख सहभागी रचनाकार –
🔸 महाराष्ट्र: श्री विजय रघुनाथराव डांगे, श्रीमती मेघा अग्रवाल
🔸 बिहार: श्री बिनोद कुमार पाण्डेय, श्री दुर्गादत्त मिश्र "बाबा"
🔸 उत्तर प्रदेश: श्री सुनील कुमार खुराना, श्री अवधेश प्रसाद मिश्र "मधुप", डॉ. ॐ ऋषि भारद्वाज, श्रीमती साधना मिश्र "विंध्य"
🔸 मध्य प्रदेश: डॉ. मंजू शकुन खरे, श्रीमती ज्योति प्यासी, श्रीमती संध्या श्रीवास्तव "साँझ", श्री पवनेश मिश्रा
🔸 उत्तराखंड: डॉ. अंजू सेमवाल
🔸 हरियाणा: श्रीमती शोभा प्रसाद
🔸 लद्दाख: श्रीमती ज्योति राघव सिंह
🔸 राजस्थान: श्री विष्णु शंकर मीणा
🔸 पंजाब: डॉ. रवि घायल
🔸 पश्चिम बंगाल: डॉ. निधि जैन बोथरा
🔸 गुजरात: संस्थापिका दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा
🌼 अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. ॐ ऋषि भारद्वाज जी ने कहा कि — “कल्पकथा जैसी संस्थाएँ साहित्य की निरंतर गंगधारा बनकर समाज को संस्कार देती हैं। हास्य और श्रृंगार से ओतप्रोत यह गोष्ठी एक समरस रसपान रही।”
📿 संस्थापिका दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा जी ने "सर्वे भवन्तु सुखिनः" मंत्रोच्चार के साथ शान्तिपाठ करते हुए सभी साहित्यकारों एवं श्रोताओं को हृदयतल से धन्यवाद ज्ञापित किया।
🎇 कल्पकथा परिवार की यह २०२वीं काव्यगोष्ठी न केवल रचनात्मक रसों की निर्झरिणी रही, वरन् यह साहित्य को समाज से जोड़ने की एक सशक्त कड़ी सिद्ध हुई।