गुरु की एक सीख पूरी जिंदगी पलट देती है
एक शिष्य ने पूछा — “गुरुदेव, ईश्वर कहाँ मिलता है?”
गुरु मुस्कुराए और बोले — “जहाँ स्वार्थ खत्म होता है,
वहीं से ईश्वर दिखने लगता है।”
शिष्य बोला — “कैसे पहचानूँ कि मिल गया?”
गुरु बोले — “जब तुम्हें सबमें अपना अंश दिखे,
तब समझना तुमने उसे पा लिया।”
भारत का दर्शन यही है —
ईश्वर बाहर नहीं, भीतर है।
जो खुद को पहचान लेता है,
वो सृष्टि को समझ लेता है।
ज्ञान की शुरुआत दूसरों को देखने से नहीं,
खुद को देखने से होती है।