जानवर सिखाते हैं कि सच्चाई और दया ही दुनिया को खूबसूरत बनाते हैं
एक बुज़ुर्ग रोज़ पार्क में कबूतरों को दाना डालता था।
एक दिन बारिश में नहीं आया,
तो कबूतर उसी के घर की खिड़की पर बैठ गए।
उन्होंने इंतज़ार किया जब तक वो लौट नहीं आया।
वह मुस्कुराया और बोला — “इनमें वफ़ादारी इंसानों से ज़्यादा है।”
जानवर कभी धोखा नहीं देते,
वे सिर्फ उतना ही चाहते हैं जितना प्यार मिलता है।
वे न जात पूछते हैं, न रूप।
उनका दिल सबसे सच्चा होता है।
अगर इंसान भी इतना सरल हो जाए,
तो दुनिया में नफ़रत नहीं, बस दया रह जाएगी।
प्रकृति और पशु हमें रोज़ याद दिलाते हैं —
प्यार बोलने से नहीं, महसूस करने से समझ आता है।
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