प्यार जताने से नहीं, निभाने से दिखता है
एक पत्नी रोज़ पति के लिए चाय बनाती थी,
भले ही वो ऑफिस के काम में उलझा रहता था।
एक दिन उसने कहा — “तुम मेरी परवाह नहीं करते।”
पति चुप रहा, फिर अगले दिन खुद चाय लेकर बोला —
“प्यार ज़ोर से नहीं बोलता, धीरे-धीरे दिखाता है।”
रिश्तों में आवाज़ नहीं, एहसास ज़रूरी है।
जो सुन ले बिना कहे, वही सच्चा साथी है।
हर रिश्ता दो लोगों की नहीं — दो दिलों की समझ से बनता है।
आजकल लोग बोलते ज़्यादा हैं, सुनते कम।
अगर थोड़ा महसूस करना सीख लो,
तो हर रिश्ता खूबसूरत बन जाएगा।
प्यार जताने से नहीं, निभाने से दिखता है।