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🏘️!! "परिवार एक मंदिर है जिसमें प्रेम, सम्मान, और कर्तव्य की पूजा होती है।" - कल्पकथा परिवार 🏘️
🎉 "!! जीवन के विविध रंगों से सजी रही कल्पकथा काव्यगोष्ठी !!" 🎉
देशप्रेम, हिन्दी भाषा, सद साहित्य एवं सनातन संस्कृति हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह ने बताया कि २००वीं ऑनलाइन काव्यगोष्ठी में सृजनकारों ने विविध सामाजिक मुद्दों पर आधारित काव्य रचनाओं से समाज को जागृत करने का प्रयास किया।
वाराणसी से जुड़े विद्वान साहित्यकार श्री अवधेश प्रसाद मिश्र "मधुप" जी की अध्यक्षता, आशुकवि श्री भास्कर सिंह "माणिक" जी व पवनेश मिश्रा के संचालन के कार्यक्रम का शुभारंभ नागपुर महाराष्ट्र से जुड़े वरिष्ठ साहित्यकार श्री विजय रघुनाथराव डांगे जी द्वारा गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना के संगीतबद्ध गायन के साथ हुआ।
जनसेवा, परिवार संस्था के महत्त्व, साइबर सुरक्षा, सनातन संस्कृति, राष्ट्र प्रथम, आदि विषयों को स्पर्श करती काव्य रचनाओं के कार्यक्रम में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, से जुड़े सृजनकारों ने प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में विजय रघुनाथराव डांगे जी, नागपुर (महाराष्ट्र), प्रमोद पटले जी, रायपुर (छत्तीसगढ़), डॉ. ओम ऋषि भारद्वाज जी, एटा (उत्तर प्रदेश), आ. निधि बोथरा जैन जी, (आराधिका साहित्य मंच), श्री अवधेश प्रसाद मिश्र "मधुप" जी, वाराणसी (उप्र), श्री दुर्गादत्त मिश्र "बाबा" जी, भोरे गोपालगंज (बिहार), श्रीमती ज्योति प्यासी जी, जबलपुर (मप्र), श्री भास्कर सिंह "माणिक" जी, कोंच जालौन (उप्र), डॉ. पंकज कुमार बर्मन जी, कटनी (मप्र), डॉ श्रीमती मंजू शकुन खरे जी दतिया (मप्र), अंजनी कुमार चतुर्वेदी "श्रीकांत" जी, निवाड़ी (मप्र), नंदकिशोर बहुखंडी जी, देहरादून (उत्तराखण्ड), श्रीमती संध्या श्रीवास्तव जी, छतरपुर (मप्र), दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा जी, एवं पवनेश मिश्रा, ने काव्य पाठ किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री अवधेश प्रसाद मिश्र "मधुप" जी ने "परिवार एक मंदिर है जिसमें प्रेम, सम्मान, और कर्तव्य की पूजा होती है।" के विचार के साथ मुक्तकण्ठ से आयोजन की प्रशंसा करते हुए सभी रचनाकारों को बधाई एवं मंगलकामनाएं दी। अंत में कल्पकथा संस्थापिका दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा ने "सर्वे भवन्तु सुखिन:" शान्ति पाठ के साथ सभी का आभार व्यक्त किया।