रवि और साक्षी की शादी को छह साल हो चुके थे।
सब कुछ ठीक था…
बस वो नज़दीकी कहीं खो गई थी।
एक रात साक्षी शीशे के सामने खड़ी थी।
हल्का सा काजल, खुले बाल और चेहरे पर थकान।
उसे एहसास हुआ कि रवि ने बहुत दिनों से उसे ऐसे देखा ही नहीं था।
रवि कमरे में आया।
उसकी नज़र शीशे में साक्षी से टकराई।
एक पल के लिए दोनों की आँखें मिलीं।
साक्षी ने धीमी आवाज़ में कहा,
“क्या मैं बदल गई हूँ?”
रवि पास आया,
“नहीं… शायद मैं देखना भूल गया था।”
उसने शीशे के सामने खड़ी साक्षी के कंधे पर हल्का सा हाथ रखा।
वो स्पर्श कोई वादा नहीं था,
बस एक एहसास था।
साक्षी की साँसें थोड़ी गहरी हो गईं।
कमरा शांत था,
लेकिन दिल बहुत कुछ कह रहे थे।
रवि ने कहा,
“हम फिर से शुरुआत कर सकते हैं…
धीरे, बिना किसी दबाव के।”
साक्षी मुस्कुराई।
उस मुस्कान में शिकायत नहीं थी,
बस उम्मीद थी।
उस रात उन्होंने कोई बड़ी बात नहीं की।
बस साथ बैठे।
पास… बहुत पास।
और वही काफी था।
✨ सीख:-
कभी-कभी रिश्ते में आग नहीं,
बस ध्यान चाहिए।
जब हम सामने वाले को फिर से
देखना सीख लेते हैं,
तो प्यार खुद महसूस हो जाता है ❤️