अमन और नेहा की शादी को सात साल हो चुके थे। प्यार था, लेकिन अब वो पहले जैसी नज़दीकी नहीं रही थी। बातें कम हो गई थीं, छूने में झिझक आने लगी थी।
एक ही घर में रहते हुए भी दोनों जैसे अलग-अलग दुनिया में थे।
एक रात, बारिश हो रही थी। बिजली चली गई। पूरा घर अंधेरे में डूब गया।
नेहा ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
“आज कॉफी पीओगे?”
अमन ने उसकी तरफ देखा। बहुत दिनों बाद उसने नेहा को इस तरह देखा था—
खुले बाल, हल्की खुशबू, और आँखों में वही पुरानी चमक।
कॉफी बनाते समय नेहा का हाथ अमन के हाथ से हल्के से टकराया।
एक पल के लिए दोनों रुक गए।
वो स्पर्श छोटा था, लेकिन दिल तक उतर गया।
कॉफी की भाप, बारिश की आवाज़ और वो ख़ामोशी…
उस ख़ामोशी में वो सब था, जो शब्दों में नहीं कहा जा सकता।
नेहा ने धीरे से कहा,
“हमें बात करना चाहिए… सिर्फ झगड़ों के बारे में नहीं, बल्कि उस बारे में भी जो हमें फिर से करीब ला सके।”
अमन ने उसका हाथ थाम लिया।
“शायद हम भूल गए थे कि प्यार सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, एहसास भी है।”
उस रात कुछ खास नहीं हुआ…
लेकिन बहुत कुछ बदल गया।
अगले दिन से दोनों ने फिर से एक-दूसरे को महसूस करना शुरू किया—
छोटी तारीफें, हल्की छेड़छाड़, देर तक आँखों में देखना।
प्यार लौट आया था।
धीरे… लेकिन गहराई के साथ।
✨ सीख: -
रिश्तों में सिर्फ साथ रहना काफी नहीं होता,
नज़दीक रहना भी जरूरी होता है।
जब हम एक-दूसरे को फिर से महसूस करने लगते हैं,
तो प्यार खुद रास्ता बना लेता है ❤️