आदित्य और मीरा की शादी को आठ साल हो चुके थे।
दिन साथ कटता था,
लेकिन रातें…
बस बीत जाती थीं।
उस शाम तेज़ बारिश हो रही थी।
मीरा खिड़की के पास खड़ी थी।
बारिश की बूंदें शीशे पर फिसल रही थीं,
जैसे वो कुछ कहना चाहती हों।
आदित्य पीछे से आया।
उसकी उँगलियाँ मीरा की उँगलियों से हल्के से टकराईं।
मीरा ने पीछे मुड़कर देखा—
वो नज़र, जो कभी उसकी कमजोरी हुआ करती थी।
“याद है,” मीरा ने धीमे से कहा,
“हम पहली बार बारिश में भीग गए थे?”
आदित्य मुस्कुराया।
“और तुम ठंड से काँप रही थी,
तो मैंने तुम्हें अपने पास खींच लिया था।”
मीरा की साँसें थमीं।
वो यादें फिर ज़िंदा हो गईं।
आदित्य ने उसका हाथ थाम लिया।
ना कोई जल्दी,
ना कोई वादा—
बस वही पुराना अपनापन।
उस रात बारिश थमी नहीं…
और उनके बीच की दूरी भी नहीं रही।
✨ सीख:-
रिश्तों में जुनून कभी मरता नहीं,
वो बस याद दिलाने का इंतज़ार करता है।
थोड़ा-सा स्पर्श,
और प्यार फिर जाग उठता है ❤️