एक किसान रोज़ अपने कुएँ से पानी निकालता था।
कुएँ की दीवारें टूटी हुई थीं, पानी आधा गिर जाता था।
लोग हँसते — “तेरा आधा पानी बर्बाद हो जाता है।”
वो मुस्कुराता — “हाँ, पर उसी रास्ते पर फूल खिलते हैं।”
क्योंकि जहाँ पानी गिरता, वहाँ उसने फूल लगाए थे।
जीवन में भी ऐसा ही होता है —
जो हमें नुकसान लगता है,
वहीं से कोई सुंदर चीज़ जन्म लेती है।
इसलिए हार को हार मत समझो,
वो तुम्हारे अगले “खिलने” की तैयारी है।
हर गिरा हुआ बूंद, किसी फूल का कारण बन सकता है।

  Akhilesh Singh


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