एक छोटी बात, लेकिन जिंदगी का बड़ा सबक
एक बेटे ने अपने पिता से पूछा — “आप कभी मुझसे नाराज़ क्यों नहीं होते?”
पिता बोले — “क्योंकि मैंने भी कभी अपने पिता को खोकर सीखा था,
कि गुस्से में बोले गए शब्द वापस नहीं आते।”
उस दिन बेटे ने पहली बार चुप्पी में प्यार समझा।
रिश्ते आवाज़ से नहीं, मौन से भी सँवारे जाते हैं।
कभी-कभी कुछ कहना नहीं,
बल्कि बस सुनना ही काफी होता है।
प्यार जताना ज़रूरी नहीं,
उसे महसूस कराना ज़रूरी है।
और याद रखो —
जो बिना कहे तुम्हें समझ ले,
वही तुम्हारा असली रिश्ता होता है।